बुधवार, 29 दिसंबर 2010

नए वर्ष का नया दिन !

दिन जो की,
कल भी वही था
आज भी वही है
नए वर्ष का नया दिन
खुद को बहलाने की
अच्छी तरकीब है !
जो कल भी आई थी
वही तो सुबह है
हाथ में फीकी चाय की प्याली
साथ में अख़बार और अख़बार में
वही बासी खबरे है !
भ्रष्टाचार,कालाबाजारी,
सब गड़बड़ घोटाले है
भ्रष्ट अफसर बेईमान नेताओंके
काले चिठे कारनामे है
नए साल में नया क्या है ?
पिछले साल भी
अधिक थी महंगाई
अब की बार और जादा है
आम आदमी को
प्याज कल भी रुलाता था
आज भी रुला रहा है
दुखों की फेहरिस्त लम्बी है दोस्तों
टूटे-टूटे सब सपने है
बुझी-बुझी आशाये है
जिसके भी दरवाजे जाओ
कोई गमगीन मिला
कोई बदहाल हुआ
यहाँ मरने के है लाख बहाने
पर जीने की कोई वजह
नहीं है !


(फेसबुक के सभी प्रशंसक ,सभी ब्लॉगर मित्रों को,
नए वर्ष की अनेक शुभकामनाये ! )

4 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति
आपको और आपके परिवार को मेरी और से नव वर्ष की बहुत शुभकामनाये ......

संजय भास्कर ने कहा…

खुशियों भरा हो साल नया आपके लिए

अशोक बजाज ने कहा…

सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें, और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े .
नव - वर्ष २०११ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

यहाँ मरने के है लाख बहाने
पर जीने की कोई वजह
नहीं है .....

ज़िन्दगी के खेल में जिसे जीना आ गया वो पास हो जाता है ...
वरना हम जैसे फेल का सर्टिफिकेट हाथ में लिए फिरते हैं .....