शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

आधुनिक नारी तुमने .....

हे आधुनिक नारी
तुमने,
ये क्रांति का कैसा
बिगुल बजाया है
पब,पार्टियों की
शोभा बनकर
हाथ में शराब
और सिगरेट लिये
पुरुषों से समान
हक्क पाने का !
अब कैसे कोई
तेरे प्यार में,
कवि बनेगा !
कैसे लिखेगा
कालिदास तुमपर
 कविता !

9 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

kuch nahi kiya ja sakta ...

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

सच्ची चिंता का का विषय चुना है सुमन जी आपने॥

Sunil Kumar ने कहा…

सही विषय उठाया,भगवान आपकी इच्छा पूरी करे और करोड़ों कवि पैदा हो जाये.......

कुमार राधारमण ने कहा…

नारी को आधुनिक बनने का भूत सवार है- उन तमाम दुर्गुणों के साथ,जिनके लिए वे पुरातन से पुरुषों को कभी समझाती आई हैं,तो कभी धिक्कारती!

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

विचारणीय पंक्तियाँ ....

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

विचारणीय पोस्ट !

Kunwar Kusumesh ने कहा…

जैसे ही आसमान पे देखा हिलाले-ईद.
दुनिया ख़ुशी से झूम उठी है,मनाले ईद.
ईद मुबारक

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत अच्छी कविता बधाई और शुभकामनाएं

आशा जोगळेकर ने कहा…

इनको सन्मति दे भगवान । स्वतंत्रता के नाम पर उत्छृंकलता । अच्छा विषय और सटीक कविता ।