शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

बदलाव ...


आश्रम में तोड़ फोड़ 
शिविर में लगाई आग 
विरोध के दौरान 
थोडा धैर्य रखिए 
हो रहा बदलाव ...!

        ***
तब उस विंडो के सामने 
खड़े रहने की थी मनाई 
अब इस विंडो के सामने 
दिन-रात बैठने आजादी 
क्या यह बदलाव नहीं ...?

5 टिप्‍पणियां:

Ramakant Singh ने कहा…

बदलाव चाहे सार्थक हो या निरर्थक या फिर नकारात्मक है तो बदलाव ही

रश्मि प्रभा... ने कहा…

बदलाव है .... क्योंकि खुद को समझने,मानने की समझ आई है

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (13-12-2013) को (मोटे अनाज हमेशा अच्छे) चर्चा मंच-1123 पर भी होगी!
सूचनार्थ!

रविकर ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति |
बढ़िया विषय |
शुभकामनायें आदरेया ||

आशा जोगळेकर ने कहा…

बदलाव ही आना चाहिये । हम में भी औरों में भी ।