शुक्रवार, 14 सितंबर 2007

राखी के बहाने

सुबह का उजाला
आज मेरे घर
यूँ ही चला आया है !

राखी के बहाने

याद भाई की
लाया है !
राखी का पर्व दिन
खुशियोंका त्यौहार
संग अपने लाया है
प्यार और उल्हास
मिठाई, रोली, चंदन
भाई बहन का प्यार
जन्मों का है बन्धन !
भाई,
भेज रही हूँ राखी
साथ मे रेशम की डोर
गोरी गोरी कलाई पर
 बांधकर
स्नेह का उपहार दो !

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