मंगलवार, 25 जून 2013

प्रेम शब्द, जिसमे जादू है ....


अनेक शब्द,
लोक-व्यवहार
के चलते
भले ही अपने
अर्थ, उपयोगिता
खो रहे हो
लेकिन प्रेम
अब भी
ऐसा शब्द है
जिसमे जादू
है ...!

***

किसी से हम
इसलिये प्रेम
करते है कि,
उससे हमारी
सारी मनोकामनायें
पूरी होंगी
तब समझ लेना
हम उससे
प्रेम नहीं
प्रेम करने का
बहाना कर
रहे है ....!

19 टिप्‍पणियां:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर रचनाएँ

Ranjana verma ने कहा…

!प्रेम पर सुंदर अभिव्यक्ति .....!!

Ranjana verma ने कहा…

!प्रेम पर सुंदर अभिव्यक्ति .....!!

Rajendra kumar ने कहा…

आपकी यह रचना कल गुरुवार (27-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

अत्यंत सुंदर रचना.

रामराम.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

किसी से हम
इसलिये प्रेम
करते है कि,
उससे हमारी
सारी मनोकामनायें
पूरी होंगी
तब समझ लेना
हम उससे
प्रेम नहीं
प्रेम करने का
बहाना कर
रहे है ....!

प्रेम की अत्यंत सुंदर परिभाषा.

रामराम.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

किसी से हम
इसलिये प्रेम
करते है कि,
उससे हमारी
सारी मनोकामनायें
पूरी होंगी
तब समझ लेना
हम उससे
प्रेम नहीं
प्रेम करने का
बहाना कर
रहे है ....!

प्रेम की अत्यंत सुंदर परिभाषा.

रामराम.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बिलकुल सही कहा है ....सुंदर रचनाएँ ।

ओंकारनाथ मिश्र ने कहा…

पूर्ण सत्य.

Ramakant Singh ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति

संजय भास्‍कर ने कहा…

बिलकुल सही कहा है

annapurna ने कहा…

प्रेम की बड़ी सुंदर व्यख्या की है ।

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की ५५० वीं बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन की 550 वीं पोस्ट = कमाल है न मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Tamasha-E-Zindagi ने कहा…

सुन्दर कविता |

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

प्रेम गली अति साँकरी ,जामें दुइ न समाय!

Saras ने कहा…

बहुत सुन्दर...!

सुज्ञ ने कहा…

यथार्थ चित्रण

Durga prasad mathur ने कहा…

किसी को पवित्र, निस्वार्थ व समर्पित भाव से चाहने का अहसास ही सच्चा प्रेम या प्यार है । यही कारण है कि नारी को उसके निश्चल और असीम प्यार के कारण समाज में शक्ति का प्रतिक माना जाता है । प्रेम रस की रचना के लिए बधाई !!

ichat ने कहा…

प्रेम तो बस प्रेम है । सुंदर कविता ।