सोमवार, 28 अप्रैल 2014

अटपटी चटपटी बातें …

कुर्सी एक, उसके 
पीछे भीड़ असंख्य है 
ऐसे लग रहा है 
जैसे देश की उन्नति 
प्रजा का सुख 
कुर्सी और पावर 
में ही निहित है 
चटपटी बात है  .... !

कीचड़ में कमल 
खिलता है 
कितनी सही बात है 
लोक लुभावन 
वायदों की कीचड़ मे 
सुगंध बिखेर रहा है 
कमल खिल रहा है 
अटपटी बात है    … !

मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

सत्ता की भूख …

कोई,
भैंसों का 
चारा  खाये 
कोई नग्न हो 
भैंसों को 
खिला रहा 
है   … 
बड़ी अजीब 
है ये 
सत्ता की
भूख भी 
कोई 
खा रहे है 
थप्पड़    
कोई 
खा रहे है 
जूते    … !!