मन है मेरा कोरा कागज
जैसे चाहूँ चित्र बनाऊँ !
फूल-पौधे पशु-पक्षी बनाऊँ,
हरी-भरी धरती पर
महका-महका एक
उपवन बनाऊँ !
मन न्यारे, मानव न्यारे
पावन धरती पर एकता का
एक सुंदर मंदिर बनाऊँ !
हिंद हिमाचल, यमुना गंगा
बनाऊँ शान से लहराता तिरंगा !
जननी जन्मभूमि बनाऊँ
प्रेम अहिंसा के रंगों से
प्यारे भारत का चित्र सजाऊँ !!