शनिवार, 11 अगस्त 2012

जैसे चाहूँ चित्र बनाऊँ ... ( बाल कविता )


मन है मेरा कोरा कागज 
जैसे चाहूँ चित्र बनाऊँ !

फूल-पौधे पशु-पक्षी बनाऊँ,
हरी-भरी धरती पर 
महका-महका एक 
उपवन बनाऊँ !

मन न्यारे, मानव न्यारे 
पावन धरती पर एकता का 
एक सुंदर मंदिर बनाऊँ !

हिंद हिमाचल, यमुना गंगा 
बनाऊँ शान से लहराता तिरंगा !

जननी जन्मभूमि बनाऊँ 
प्रेम अहिंसा के रंगों से 
प्यारे भारत का चित्र सजाऊँ !!

बुधवार, 1 अगस्त 2012

हाईकू रचनाएँ !


रक्षा बंधन 
है भाई बहन का 
प्यारा बंधन !

थाल सजाये 
राह देखे बहना 
भाई न आया !

भाई को देख 
भर आये नयना 
स्नेह छलका !

तिलक माथे 
कलाई पर राखी
मन भावन !

भाई तुझ-सा 
हर जनम मिले 
कामना यही !

न हो विपदा 
भाई के जीवन में 
बहना सोचे !




शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

ऐ चाँद आसमा के...

ऐ चाँद आसमा के
जब भी तुम अपनी 
चांदनी से मिलने 
नील गगन में 
आ जाते हो 
सारा अस्तित्व जैसे 
दुधिया गंगा में 
पोर-पोर 
नहा जाता है 
चटक कर कलियाँ 
फूल बन खिल 
जाती है !
मदमस्त होकर सुरभि 
हवाओं में सौरभ 
भर देती है !
लिये पलकों पर 
स्वप्न सिंदूरी 
चाँद की बांह में 
चांदनी सुरमई 
हो जाती है !
भोर प्रात में जब 
चांदनी से बिछड़ कर 
घडी भर भी रुकते 
नहीं हो न चाँद,
तब धरती के 
पात-पात पर 
शबनम मोती-सी 
बिखर जाती है !
चांदनी के आंसू ही 
शबनम नहीं तो 
और क्या है !

शुक्रवार, 15 जून 2012

एक ऐसी पाठशाला चाहिए हमको ... ( बाल कविता )



खेल-खेल में समझाए सबको,
एक ऐसी पाठशाला चाहिए हमको 
पीठ पर भारी बस्तों का बोझ नहीं,
कभी शिक्षा मन पर भार न हो !
जहाँ ऊँच-नीच का भेद नहीं,
शिक्षा बेचने का व्यापार न हो !
मोटर-गाड़ियों का शोर नहीं,
खेलने - कूदने का मैदान हो !
कक्षा में रैंक का सिस्टम नहीं,
महत्वाकांक्षा की होड़ न हो !
परीक्षाएँ चरित्र की पहचान नहीं,
खेल-खेल में समझाएँ सबको !
एक ऐसी पाठशाला चाहिए हमको !!

सोमवार, 21 मई 2012

तितली रानी ......


तितली रानी, तितली रानी
कभी इस डाल पर, कभी उस डाल पर
कभी इस फूल पर, कभी उस फूल पर
उड़ती फिरती हो तुम फुलरानी !
हाथ लगाऊँ तो, पंख फट जाते है
डोर बांधु तो, पाँव टूट जाते है
नाजुक कितनी हो तुम शर्मीली !
दूर घर से तुम कब निकलती हो
कितने सारे रंग तुम बदलती हो
पल-पल छलती हो, तुम जादूगरनी !
तुम आती हो तो, फूल खिलते है
तुम आती हो तो, हम खुश होते है
सब के मन को मोहती हो, 
तुम मनमोहिनी....
तितली रानी, तितली रानी
उडती फिरती हो तुम फुलरानी !

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

हैप्पी वैकेशन ........ { बाल कविता }


चिंताएँ सारी दूर हुई,
परीक्षाएँ भी समाप्त हुई 
पढ़-पढ़ कर इतना बोर हुई 
सिर-दर्द हुआ एजुकेशन 
कल से है हैप्पी वैकेशन !

किताबों ने दिमाग खाया 
टीचरों ने भी जान खायी 
भारी बस्तों से कमर झुकी 
विदा करेंगे सारा टेन्शन 
कल से है हैप्पी वैकेशन !

साथी-सहेलियों के गले मिलेंगे 
गिले-शिकवे सब दूर करेंगे 
आँखे थोड़ी-सी नम करेंगे 
मिल-जुलकर करेंगे सेलिब्रेशन 
कल से है हैप्पी वैकेशन !

तभी टीचर ने कहा अटेंशन 
बच्चों खाओ, खेलो मौज करो 
नाचों,  गाओ या सैर करो 
ढेर सारा होमवर्क देते हुये कहा ....
छुट्टियों में होमवर्क कंप्लीट करो !! 

बुधवार, 11 अप्रैल 2012

भाव असीम है आकाश की तरह ...


जीवन के कुछ महत्वपूर्ण
बातों को समझने और 
समझाने से पहले उस 
विषय जानकारी की 
विशिष्ट योग्यता का होना 
अनिवार्य शर्त है !
इसके अभाव में जो कुछ 
कहना चाहा था अनकहा 
रह जाता है !
जो नहीं कहना चाहा था 
और मुखर हो जाता है 
शायद इसीलिए .... 
उन शब्दों के अर्थ कम 
अनर्थ ज्यादा निकाले जाते है !
जब कोई एक चित्रकार 
कोरे कागज पर,
आकाश का चित्र बनाये 
निश्चित ही वह आकाश 
आकाश नहीं होता 
आकाश तो वह होता है 
जो सब जगह घेर लेता है 
किन्तु चित्र में आकाश 
कहाँ घेर पाता है सब कुछ 
चित्रित आकाश सिमित है !
ऐसे ही कागज पर लिखे 
हुये शब्द भाव कहाँ घेर 
पाते है तभी शब्द सिमित 
और भाव असीम है 
आकाश की तरह !