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Main aur Meri Kavitayen
शुक्रवार, 11 जनवरी 2013
बदलाव ...
आश्रम में तोड़ फोड़
शिविर में लगाई आग
विरोध के दौरान
थोडा धैर्य रखिए
हो रहा बदलाव ...!
***
तब उस विंडो के सामने
खड़े रहने की थी मनाई
अब इस विंडो के सामने
दिन-रात बैठने आजादी
क्या यह बदलाव नहीं ...?
गुरुवार, 20 दिसंबर 2012
जाड़े की नर्म धूप ....
कंपकपाती
सर्द हवा
शीतल सब
गात है
धरती के
आगोश में
उंघ रही
रात है !
कुछ-कुछ
सोया-सा
तन
कुछ जागा-सा
मन है
निंदियारी
पलकों में
सपनों के
रूप है !
जब भोर
आंख खुली तो,
प्राची में
फैल गए थे
सिंदूरी रंग
धीरे से ...
आंगन में
सरक आयी थी
जाड़े की नर्म
धूप है ....!
सोमवार, 10 दिसंबर 2012
बारिश का मौसम नहीं था ....
आज,
अचानक भाव की
बदली छाई
हृदयाकाश में
आंखे रिमझिम
बरस गई
बारिश का मौसम
नहीं था ...
मैंने तो बस
एक फूल ही
मांगा था पूजा के
बदले में
तुमने फूलों से ही
भर दी मेरी झोली
बसंत का मौसम
नहीं था ...
मैंने तो बस
एक गीत ही
मांगा था तुमसे
गुनगुनाने के लिए
तुमने तो मेरे
जीवन को ही
गीत बना डाला
मुझको छंदों का ज्ञान
नहीं था ...
पता नहीं लोग
यह क्यों कहते है
बिन मौसम कुछ
नहीं होता .....
( प्यारे सद्गुरु ओशो के चरणों में नमन, उनके जन्मदिन पर )
सोमवार, 3 दिसंबर 2012
क्यों न तुम भी गीत गाओ ....
मन,
जीवन है अगर गीत तो,
क्यों न तुम भी गीत गाओ ...
रात ने कहा भोर से अंतिम विदा
चाँद ने कहा चांदनी से अलविदा
ओस बिखर कर पात पर मोती बनी
हर कली मुस्कुरा कर पुष्प बन कर खिली
इतराती संग हवा के मस्त सुरभि चली
जब भौरों ने कहा रुनझुन-रुनझुन
क्यों न तुम भी गुनगुनाओ ....
पंछियों की मधुर कलरव
तितलियों की लुकछिप-लुकछिप
खेल खेलती तरु-तरु पर
तन की काली श्यामल-श्यामल
मीठे गीत गाती है कोयल
जब डोलता है संसार सारा
क्यों न तुम भी डोल जाओ
जीवन है अगर गीत तो
क्यों न तुम भी गीत गाओ....
शनिवार, 10 नवंबर 2012
रात की निस्तब्धता को चीर कर ...
विश्वास
श्रद्धा की
ज्योति
ज
ब भी
ड
गमगाने
लगती है
तब
तुम
चूपके से
घर मेरे
आ जाते हो
बुझते इन
दीपों में
स्नेह तेल
भर जाते हो
रात की
निस्तब्धता को
चीर कर ...
शुक्रवार, 2 नवंबर 2012
एक दिन का देवता ....
कल वर्ष भर के
सारे सुप्त सुख
लौट आये थे
एक दिन में,
आल्हादित हुआ
था मन अपने इस
एक दिन के
भाग्य पर
समय और भाग्य ने
एक दिन का देवत्व
होने का गौरव
जो प्रदान किया था !
दुसरे दिन ...
सुबह पांच बजे
आलार्म का
कर्णकर्कश स्वर
मानो कह रहा था
अगर एक दिन का
देवता होने का भ्रम
दूर हुआ हो तो उठो
"उठो ...देव
कितने सारे काम
करने है ..
डेयरी से दूध लाना है
चाय बनानी है
पीने का पानी
नल से भरना है
सब्जी लानी है
गिनती बढती जा
रही थी .....!
गुरुवार, 1 नवंबर 2012
हम भी महक ले जरा .....
चाँद ,
महक तुम्हारी
बढ़ जायेगी खास
फलक पर आ
हम भी महक
ले जरा ...
जी भर कर
निहार लेंगे
तूम भी
निहार लो
हमे जरा ....
आज
बादलों में क्यों
छूप गये हो तूम
स्याह बादल
हटाओ जरा ....
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