बुधवार, 23 अक्टूबर 2013

छुटते जा रहे है कुल -किनारे


दिन ब दिन 
सूखती  जा रही है 
जीवन सरिता 
छुटते जा रहे है 
कुल-किनारे 
समय था तब 
समझ न थी 
अब समझ है 
लग रहा है 
समय कम है 
न बीते एक 
लम्हा भी 
तेरी याद बिन 
रिक्त न बीते 
हे ईश्वर ,
ऐसे ही बीते 
तेरे ही गीत 
गुनगुनाते   
हर पल 
हर लम्हा  … 



शनिवार, 19 अक्टूबर 2013

तुम्हारा पता …


तुम्हारा पता 
हर कोई 
बता देता है 
पर, 
कोई एक 
बन जाता है 
मील का पत्थर 
इन्ही निशानों का 
लेकर सहारा 
चल तो देती हूँ 
एक कदम 
तुम्हारी  ओर  
इसी उम्मीद में कि 
तुम  भी चल 
दोगे प्रेम से 
दो कदम 
मेरी ओर     … !!


सोमवार, 16 सितंबर 2013

पत्ते -पत्ते पर लिख कर …


                 
  जब,
सुबह -सुबह 
पत्ते -पत्ते पर 
लिख कर 
प्रणय छंद  
हवा ने 
हौले से छुआ 
गुलाबी तन 
   तब,
खिल कर 
महक उठा 
 गुलाब 
मेरे आँगन में  ....! 

मंगलवार, 3 सितंबर 2013

खुबसूरत शब्द …

सुन्दर,
खुबसूरत 
शब्दों से 
सामने वालों को 
प्रभावित कर, 
विद्वत्ता पूर्ण 
तर्कों से 
उनका मुंह 
बंद करना 
जितना 
आसान है,
उन्ही सुन्दर 
शब्दों से उन्ही 
विद्वत्ता पूर्ण 
तर्कों से, 
खुद की 
जन्दगी को 
खुबसूरत 
बना कर 
अर्थपूर्ण 
बना देना 
उतना ही 
मुश्किल 
काम है    … !!

बुधवार, 28 अगस्त 2013

प्रतियोगिता ...

इन दिनों 
हमारे देश का 
सारा चिंतन 
प्याज से 
होता हुआ 
रुपये और चरित्र 
पर आकर 
अटक गया है 
क्यों न हो 
रुपये और चरित्र में 
इन दिनों 
भारी प्रतियोगिता 
जो चल रही है 
कि, कौन कितना 
अधिक गिरता 
है !


गुरुवार, 22 अगस्त 2013

सूफियाना इश्क ….

प्रेम,
व्यक्ति को बदल कर 
भिखारी से सम्राट जैसा 
बना देता है लेकिन 
कई बार अपेक्षायें 
ऐसा होने नहीं देती 
समय के साथ-साथ 
हर चीज बदल जाती है 
प्रेम भी,
जब ह्रदय प्रेम से 
लबालब भर जाता है 
तब प्रेम को ग्रहण 
करने वाला पात्र भी 
छोटा पडने लगता है 
शायद इसी कारण से 
इश्क भी सूफियाना 
हो जाता है !
क्या प्रेम एक 
रासायनिक प्रक्रिया 
का नाम है  … ??

सोमवार, 5 अगस्त 2013

देव तुमने … (बालकविता)


दस साल पहले बच्चों की एक पत्रिका के लिए लिखती थी,
उस पत्रिका में छपी थी यह बाल कविता !

देव तुमने,
कैसे बनाये खुबसूरत 
चांद-सूरज 
जगमग करते 
तारे सुंदर 
इतने दूर गगन में 
कैसे बुनी 
नीली-नीली 
चादर  …. !
देव तुमने,
कैसे बनाये 
खुबसूरत पेड़-पौधे 
पशु-पक्षी,नदियाँ 
पर्वत, सागर 
खुशबूदार इन फूलों में 
कैसे तुमने 
भरे है रंग  … !
देव तुमने,
कैसे बनाई 
धरती और 
धरती के 
कागज पर 
विविध मानव के 
कैसे बनाये 
चित्र  … !