अभिव्यक्ति की आजादी
हर किसी को है
लेकिन चंद संबुद्ध
रहस्यदर्शी ही
सही मायने में उसका
उपयोग कर पाते है
जस का तस नग्न सत्य
कह पाते है
जब हम और आप कहते है
तब हजारों उंगलियां उठती है
हमारी ओर विरोध स्वरूप
लोग कहाँ पचा पाते है
उस नग्न सत्य को .... !!
हर किसी को है
लेकिन चंद संबुद्ध
रहस्यदर्शी ही
सही मायने में उसका
उपयोग कर पाते है
जस का तस नग्न सत्य
कह पाते है
जब हम और आप कहते है
तब हजारों उंगलियां उठती है
हमारी ओर विरोध स्वरूप
लोग कहाँ पचा पाते है
उस नग्न सत्य को .... !!
